Wednesday, February 22, 2017

मुझे बेतरक़ीब रहने दो!

मुझे बेतरकीब रहने दो..
मुझे तुम्हारी तरकीब से जीना नहीं आता।

कि रातों को देर तलक नींद नहीं आती
सुबह को जल्दी उठना नहीं आता...

न नहाना लाजमी लगता है,
और बेवजह संवरना नहीं आता।

मैं दिल की सुनके मुफ्त में भी लिखती हूँ.
मुझे तुम्हारी तरह बेमन से कमाना नहीं आता।

औरों की तरह बन जाओ दुनियां बेशक ये कहती हो,
औरो की तरह बनकर घुंट भी जाऊँ, तो बचाने को ज़माना नहीं आता।
- मानबी