Monday, November 21, 2016

बोल कि लब आज़ाद है तेरे!

चाहे आप एंटी नैशनल है या भक्त!
चाहे आप सरकार की हर हाँ में हाँ मिलाते है या हर दांव का पेच ढूंढते है!

चाहे आप केवल फेसबुक पर ग्राउंड रियालिटी चेक करते है या 
ग्राउंड पर जाकर भी सच नहीं देख पाते है!

चाहे आप ज़ी और सुदर्शन न्यूज़ देख कर अपना सच तय करते है या टाइम्स और एनडीटीवी के भरोसे बैठते है!

आप चाहे जो भी है.... बोलिये.. बोलते रहिये... यहाँ ...इस स्पेस पर लिखते रहिये। क्योंकि आज़ाद है आप। आपसे बोलने-लिखने का हक़ कोई नहीं छीन सकता।
पर कुछ करने का अधिकार न जाने कौन छीन ले गया... है न?

इसलिए न भक्त कुछ करता है, न एंटी नैशनल। ये दोनों सिर्फ बोलते है। एक दूसरे पर बोलने के अधिकार की धांक़ जमाते है। और इन दोनों के बोलने का मुद्दा भर बना वो - जो भक्त है न एंटी नैशनल, न संघी है न लिबरल... वो कतार में लगा रहता है ... इस उम्मीद से कि बोलने की आज़ादी रखने वाले ये फ़ेसबुकिया लोग एक दिन अपने कुछ करने की आज़ादी का दम भी भरेंगे और इनके लिए ग्राउंड पर कुछ करेंगे।

फिर भी बोलते रहिये.....